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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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जलसेना थी। उसके जलसेनापति अलीरज़ा ने मलद्वीप नामके क़रीब
बारह हज़ार छोटे बड़े टापुओं को विजय कर उन्हें हैदरअली के
राज में मिला लिया था।
हैदरअली लिखना पढ़ना बिलकुल न जानता था। एक मुसल-
मान इतिहास लेखक लिखता है कि उसने फ़ारसी
अक्षरों में अपना नाम लिखने का प्रयत्न किया।
बड़े परिश्रम से वह अपने नाम का केवल पहला अक्षर ‘हे’ सीख
पाया। किन्तु इस ‘हे’ को भी वह सदा उलटा और ग़लत लिखा
करता था। यही उसके दस्तख़त थे। इस पर भी तमाम भारतीय
और विदेशी इतिहास लेखक मुक्त कंठ से स्वीकार करते हैं कि
उसकी बुद्धिमत्ता, दूरदर्शिता, नीतिज्ञता और शासन प्रबन्ध में
उसकी योग्यता सभी बड़े ऊँचे दरजे की थीं, वीरता और युद्ध
कौशल में वह अपने समय में अपना सानी न रखता था।
धार्मिक पक्षपात या तअस्सुब का उसमें निशान तक न था।
राज की ऊँची से ऊँची पदवियाँ उसने हिन्दुओं
को दे रक्खी थीं। उसके बड़े से बड़े मंत्री हिन्दू
थे। मैसूर के जिन बाग़ी सामन्तों को उसने
परास्त किया उनकी गद्दियाँ या तो उन्हीं को वापस कर दीं और
या दूसरे हिन्दू नरेशों को उनकी जगह बैठा दिया। अपनी हिन्दू
और मुसलमान प्रजा के साथ वह एक समान उदार व्यवहार रखता
था। उसने अनेक हिन्दू मन्दिर बनवाए और अनेक मन्दिरों को
जागीरें अता कीं। हाल में उस समय के इतिहास की खोज द्वारा
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