भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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कहलाता था । दिल्ली दरबार के सूबेदारों में उसकी गिनती थी ।
मैसूर का वह 'दैव' था । और हम ऊपर लिख चुके हैं कि मैसूर
राज के अंदर 'दैव' का पद ठीक वैसा ही था जैसा मराठा साम्राज्य
के अंदर पेशवा का । 'दैव' की गद्दी अब हैदरअली के कुल में पैतृक
हो गई थी । अपनी वीरता द्वारा उसने मैसूर राज को बहुत अधिक
बढ़ा लिया था । मरते समय उस तमाम इलाक़े को छोड़कर, जो
उसने हाल के युद्ध में अपने शत्रुओं से विजय किया था, उसके
बाक़ी राज का क्षेत्रफल अस्सी हज़ार वर्गमील था, जिसकी सालाना
बचत शासन का तमाम ख़र्च निकाल कर तीन करोड़ रुपए से
ऊपर थी । उसकी कुल स्थायी सेना तीन लाख चौबीस हज़ार थी,
जिनमें १६,००० सवार, १०,००० तोपख़ाने के सिपाही, १,१५,०००
पैदल और १,८०,००० इस तरह की सेना थी जो दूसरे सरदारों
के अधीन हर समय तैयार रहती थी और आवश्यकता पड़ने पर
बुला ली जाती थी । उसके ख़ज़ाने के जवाहरात और नक़दी का
अन्दाज़ा अस्सी करोड़ रुपये से ऊपर का था। उसकी पशु शालाओं
में ७०० हाथी, ६,००० ऊँट, ११,००० घोड़े, ४,००,००० गाय और
बैल, १,००,००० भैंस, और ६०,००० भेड़ें थीं । उसके शस्त्रागार में
६,००,००० बन्दूक़, २,००,००० तलवार और २२,००० तोपें थीं ।
हैदरअली अपने समय का अकेला भारतीय नरेश था जिसने
अपने समुद्र तट की रक्षा के लिए एक जहाज़ी
उसकी जल सेना बेड़ा, जिसके हर जहाज़ पर तोपें लगी हुई थीं,
रख रक्खा था । उसकी जलसेना अपने समय की एक ज़बरदस्त