भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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हथियार रखवा कर उन्हें आज़ाद छोड़ देता था और प्रजा के
जान माल और उनकी स्त्रियों के सतीत्व की रक्षा का पूरा
प्रबन्ध कर देता था।* आम्बूरगढ़ का क़िला टीपू ने वहाँ के अंगरेज़
क़िलेदार और उसकी सेना से १५ दिन के मोहासरे के बाद विजय
किया। इसी प्रकार हैदर के दूसरे सेनापतियों ने अन्य अनेक क़िलों
और इलाक़ों को विजय किया।
गवरनर जनरल वारन हेस्टिंग्स करनल बेली की सेना के
[उप-शीर्षक: अंगरेज़ों की घबराहट] सर्वनाश, जनरल मनरो की भगदड़ और हैदर
की अपूर्व विजयों के समाचार सुन कर घबरा
गया। बंगाल में [उस] समय भयंकर दुष्काल
पड़ा हुआ था। लिखा है कि प्लासी से उस समय तक यानी
अंगरेज़ी राज के शुरू के बीस साल के अन्दर बंगाल की आबादी
घटते घटते ८० लाख से ६० लाख रह गई थी।† तिस पर भी
वारन हेस्टिंग्स ने इन समाचारों को सुनकर अकाल पीड़ित बंगाल
के ख़ज़ाने से १५ लाख रुपए नक़द और सर आयर कूट के अधीन
एक बहुत बड़ी सेना मय तोपख़ाने के बंगाल से मद्रास के लिए
रवाना की। यह सेना ५ नवम्बर सन् १७८१ को मद्रास पहुँची।
मद्रास में नवाब मोहम्मदअली ने सर आयर कूट के सामने अपनी
तबाही का रोना रोया। मोहम्मदअली के पास अभी तक धन
मौजूद था, नई सेना के ख़र्च के लिए कूट ने दो लाख पैगोडा मानी
[Footnotes]
- Ibid p. 409.
† History of Hyder, By M. M. D. L. T., p. 162.