भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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को शहर और उसके आसपास के इलाके का सूबेदार नियुक्त कर
दिया। शहर के अधिकांश कर्मचारियों को अपने अपने ओहदों पर
बहाल रक्खा और क़िले की मरम्मत तथा रक्षा और नगर के
शासन का उचित प्रबन्ध कर दिया।
हैदर की विजयों की एक विशेषता यह थी कि वह जिन
इलाकों को फ़तह करता था वहाँ के क़िलों की मरम्मत, हिफ़ाज़त
और शासन का प्रबन्ध करके आगे बढ़ता था। हैदर हर जगह
इस बात का ख़ास इन्तज़ाम रखता था कि उसके सिपाही प्रजा
के ऊपर किसी तरह का अत्याचार न करें। वह अक्सर विजय
के बाद ग़रीबों, साधुओं और धार्मिक संस्थाओं में धन तक़सीम
किया करता था। यही व्यवहार हैदर के अन्य सेनापतियों का
होता था।
जिन अनेक स्थानों और क़िलों को अरकाट की विजय से
[पार्श्व-शीर्षक: हैदर अली और टीपू] पहले और उसके बाद, हैदर की सेना ने अंगरेज़ी
[पार्श्व-शीर्षक: की अनेक विजय] सेना से एक दूसरे के बाद विजय किया उन
सब का बयान यहाँ कर सकना नामुमकिन है।
हैदर के सेनापति मीर मुइउद्दीन ने दस दिन के मोहासरे के
बाद चितोर के क़िले को फ़तह किया और फिर चन्दरगिरि
के क़िले को जीत कर नवाब मोहम्मदअली के भाई अब्दुलवहाब
ख़ाँ को क़ैद किया। टीपू ने एक महीने के अन्दर महीमण्डलगढ़,
कैलाशगढ़, सातगढ़ इत्यादि अनेक मज़बूत क़िले फ़तह किए।
टीपू हर जगह अपने बाप के समान क़िले की पराजित सेना से