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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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३४६ भारत में अंगरेज़ी राज
क़रीब सात लाख रुपए मोहम्मदअली से और वसूल किए। तीन
महीने तक सर आयर कूट मद्रास में रह कर हैदरअली से लड़ने की
केवल तैयारी करता रहा। उसके बाद वह अपनी विशाल सेना सहित
हैदरअली के मुक़ाबले के लिए बढ़ा। हैदरअली उस समय मद्रास के
नीचे के बन्दरगाहों और क़िलों को फ़तह कर रहा था। दो बार
जनरल कूट अपनी विशाल सेना लेकर हैदरअली के मुक़ाबले के लिए
बढ़ा। दोनों बार कई कई जगह कूट और हैदरअली की सेनाओं में
संग्राम हुए। किन्तु दोनों बार जनरल कूट को बेहद नुक़सान
उठाकर मद्रास लौट आना पड़ा। इस बीच और अधिक सेना
बंगाल से कूट की मदद के लिए भेजी गई। अन्त में तीसरी बार
जनरल कूट हैदरअली के मुक़ाबले के लिए बढ़ा। इस बार आरनी की
प्रसिद्ध लड़ाई में हार खाकर और लाचार होकर सितम्बर सन् १७८२
में सर आयर कूट को अपनी जान बचाकर बंगाल लौट जाना पड़ा।
इस तमाम समय में हैदरअली की सेना क़िलों पर क़िले और इलाकों
पर इलाक़े विजय करती बढ़ी चली आ रही थी और कहीं पर भी
अंगरेज़ी सेना हैदरअली की उमड़ती हुई बाढ़ को न रोक सकी।
इन तमाम लड़ाइयों में दो छोटी सी, किन्तु मनोरंजक घटनाएँ
बयान करने के क़ाबिल हैं।
पहली घटना तरकाटपल्ली की है। तरकाटपल्ली एक छोटा सा
क़िला था, जिस पर हैदरअली की सेना ने
दो मनोरंजक क़ब्ज़ा कर लिया था। त्रिचनपल्ली से अंगरेज़ों
घटनाएँ ने अपनी सेना का एक दस्ता इस क़िले पर