सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 62, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 62

३६ पुस्तक प्रवेश
विषय में दे देना चाहते हैं कि मोटे तौर पर किन किन उपायों से उस समय
से धीरे धीरे अंगरेज़ों ने भारत में एक इतना बड़ा साम्राज्य क़ायम कर लिया,
और इस देश के समृद्ध और लहलहाते हुए जीवन का अन्त कर दिया ।
अंगरेज़ी राज क़ायम होने के तरीक़े
एक यूरोपियन विद्वान लिखता है —
“किसी भारतीय सन्त ने अपने देश के अन्दर यूरोपनिवासियों
की तुलना दीमकों के साथ की है। आरम्भ में दीमकों की क्रियाएँ
या तो अंधेरे में ज़मीन के नीचे से शुरू होती हैं या कम से कम
दिखाई नहीं देतीं । किन्तु इन दीमकों का लक्ष्य निश्चित होता
है और वे चुपचाप और अज्ञात उस लक्ष्य को पूरा करने में लगी
रहती हैं। बन के हरे वृक्षों को नष्ट कर डालती हैं और उन्हें
भीतर ही भीतर खाकर उनके खोखले तनों में अपनी इमारतें खड़ी
कर लेती हैं, उन इमारतों तक पास की और दूर की कड़ी मिट्टी
की बामियों से आने जाने के लिए वे अनेक गुप्त रास्ते बना लेती
हैं। जहाँ पहले दूर तक फैले हुए देवदार के वृक्ष लहलहाते थे वहाँ
बामियाँ ही बामियाँ दिखाई देने लगती हैं। ये दीमकें हर चीज़
पर धावा करती हैं, हर चीज़ को खा जाती हैं, भीतर ही भीतर
जड़ों को खोद डालती हैं, खोखला कर देती हैं और सब वीरान
कर डालती हैं। इस उपमा पर हम अधिक गर्व नहीं कर सकते,
यद्यपि उपमा एक दरजे तक फबती हुई है । X X X किन्तु कुछ
हो, इसमें कोई सन्देह नहीं हो सकता कि भारतवर्ष के साथ
हमारे शुरू के सम्बन्ध में बहुत सी ऐसी बातें हुई हैं जिनको याद