भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहैदरअली ३४३
बढ़ते हुए देख कर जनरल मनरो का साहस टूट गया । उसे हैदर
के मुक़ाबले की हिम्मत न हो सकी । उसने अपनी तोपें और तमाम
भारी सामान गञ्जी के एक बड़े भारी तालाब में फेंक दिया और
स्वयं अपनी सेना सहित पीछे हटकर मद्रास में पनाह ली। हैदर
ने पहले गञ्जी में पड़ाव किया, आसपास के कुछ क़िलों को फ़तह
किया और फिर उस तमाम इलाक़े के शासन और रक्षा का
उचित प्रबन्ध कर पीछे लौटकर राजधानी अरकाट का मोहासरा
शुरू कर दिया ।
तीन महीने तक अरकाट का मोहासरा जारी रहा। इस
मोहासरे में दोनों ओर काफ़ी जानें [**] । हैदर का दामाद सय्यद
हाफ़िज़ अली ख़ाँ भी अरकाट ही के मैदान में काम आया । अन्त
में हैदरअली की सेना ने अरकाट के क़िले और नगर दोनों पर
क़ब्ज़ा कर लिया ।
विजय के सबेरे हैदरअली ने अरकाट के बाज़ारों और गलियों
[हैदरअली की] में एलान करवा दिया कि नगर निवासियों के
[उदारता] जान माल पर कोई किसी तरह का हमला न
करे, कोई किसी ग़रीब को किसी तरह का कष्ट
न दे और मैसूर की सेना का कोई सिपाही न किसी के धन को
हाथ लगावे और न किसी स्त्री की ओर आँख उठाकर देखे।
अरकाट के बचे हुए अंगरेज़ों को उसने अपनी गारद के साथ
हिफ़ाज़त से मद्रास भिजवा दिया। अपने एक आदमी मीर सादिक़
- Colonel W. Miles' History of Hyder, p. 395.