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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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३४ पुस्तक प्रवेश
मशहूर है उसमें कम से कम ५०० साल तक इंगलिस्तान और देशों से भी
अधिक गहरे अंधेरे में डूबा रहा ।
सारांश यह कि पाप पुण्य, या धर्म अधर्म के इस तरह के नैतिक
आदर्श जो प्राचीन वैदिक मत, बौद्ध मत, जैन मत इत्यादि के कारण
भारत में हज़ारों साल से स्थिर हो चुके थे और जो हर भारतवासी की पैतृक
मानसिक सम्पत्ति थे, उस समय तक कभी भी इंगलिस्तान में स्थिर होने
न पाये थे ।
इसके अलावा १८ वीं सदी के शुरू तक इंगलिस्तान के जन सामान्य न
केवल भयंकर दरिद्रता ही में डूबे हुए थे, वरन् थोड़े से रईसों और ज़मीं-
दारों को छोड़कर ९० फ़ीसदी इंगलिस्तान निवासियों की हालत अनेक
बातों में ज़रख़रीद गुलामों की हालत से बेहतर न थी । जिस पार्लिमेण्टरी
शासन पद्धति की इतनी अधिक डींग हाँकी जाती है, उसका जन्म भी इस
आपसी कलह और द्वेष ही में हुआ था, जिसके लिये सुसभ्य, सुसंगठित,
खुशहाल भारत में कभी कोई गुञ्जाइश ही न थी । सुसंगठित ग्राम-पंचायतों
के रूप में ग्रामवासियों के सच्चे स्वराज्य या ग्रामतन्त्र का इंगलिस्तान
निवासियों को कभी अनुमान तक न हो सकता था । न राजा और प्रजा
के बीच वह सुन्दर धार्मिक सम्बन्ध वहाँ कभी क़ायम हो पाया था जो,
हिन्दुओं और मुसलमानों, दोनों के शासनकाल में भारत में कम से कम दो
हज़ार साल से ऊपर तक क़ायम रहा । इन सब बातों को हम आगे चल
कर अधिक विस्तार के साथ बयान करेंगे ।
सच यह है कि इस तरह के नैतिक आदर्श केवल सदियों के सुसभ्य