भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवे और हम ३३
कि इंग्लिस्तान से हज़ारों जवान लड़कों और लड़कियों को हर साल
पकड़ पकड़ कर अपने साम्राज्य के दूसरे हिस्सों में लेजाकर गुलाम बना कर
बेचते रहे। एक ज़माना था जब कि रोमन साम्राज्य भर में किसी देश के
गुलामों की इतनी माँग न थी जितनी ब्रिटिश गुलामों की।
सभ्यता या संस्कृति की तीसरी लहर जो ऐतिहासिक समय के अन्दर
इंग्लिस्तान के किनारों से जाकर टकराई ईसा की सातवीं सदी में इंग्लिस्तान
निवासियों का ईसाई धर्म स्वीकार करना था। किन्तु ईसाई धर्म से भी
अपनी अनुन्नत अवस्था के कारण इंग्लिस्तान निवासियों ने सिवाय भद्दे
भद्दे मूढ़ विश्वासों, प्रतिमा पूजा, साम्प्रदायिक पक्षपात और कलह के उस
समय और कुछ न सीखा।
इसके बाद यूरोप में अरबों का समय आया। आधे यूरोप के ऊपर अरबों
का साम्राज्य क़ायम हो गया। सभ्यता, विज्ञान, शिक्षा, कला कौशल और
समृद्धि की दृष्टि से यूरोप ने कभी उससे पहले इतने अच्छे दिन न देखे थे।
इंग्लिस्तान कई कारणों से इस अरब साम्राज्य से बाहर रहा। किन्तु यूरोप
के बड़े से बड़े विद्यालय अरब प्रोफ़ेसरों से भरे हुए थे और अरबी ही सारे
यूरोप की सर्वोच्च शिक्षा का माध्यम थी। ईसा की दसवीं और ग्यारहवीं
सदियों में इंग्लिस्तान का कोई मनुष्य उस समय तक शिक्षित न माना
जा सकता था जब तक कि वह अरबी भाषा से अच्छी तरह परिचित न हो।
किन्तु थोड़े दिनों के अन्दर ही यूरोप की संकीर्ण धार्मिक प्रवृत्तियों ने अरबों
के इस असर का भी ख़ात्मा कर दिया। इसके बाद जो क़रीब एक हज़ार
साल का समय तमाम यूरोप में अंधकार युग (dark ages) के नाम से
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