भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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दीं और उनसे कह दिया कि तुम लोग अगर चाहो तो नौकरी
छोड़ कर जा सकते हो । किन्तु उन सब ने ‘इंजील और सलीब
हाथ में लेकर’ हैदर की वफ़ादारी की क़सम खाई । वे सब फिर
से नौकर रख लिए गए । अंगरेज़ों के जासूस जब फिर इन लोगों
के पास पहुँचे तो अधिकांश यूरोपियन सिपाहियों ने यह एतराज़
किया कि हम ‘इंजील और सलीब हाथ में लेकर’ सुलतान को
वफ़ादारी की क़सम खा चुके हैं । इस पर अंगरेज़ों ने यूरोपियन
ईसाई पादरियों के दस्तख़त से एक फ़तवा लिखवा कर उसकी
नक़लें हैदर के यूरोपियन नौकरों में बँटवा दीं, जिसमें लिखा था
कि—‘‘जो क़समें ‘इंजील और सलीब लेकर’ भी मुसलमानों के
सामने खाई जावें, ईसाई उनके पालन करने के लिए बाध्य नहीं
हैं।” एक फ्रांसीसी लेखक, जो उस समय हैदर की सेना में मौजूद
था, लिखता है कि इस षड्यन्त्र को सफल करने के लिए अंगरेज़ों
ने गुप्त हत्या और जालसाज़ी से भी काम लिया । अंगरेज़ी जासूसों
के पास हैदर के फ्रांसीसी सिपाहियों को फोड़ने के लिए इस समय
पुद्दुचरी के फ्रांसीसी गवरनर का एक जाली ख़त भी मौजूद था ।
इस पर भी हैदर के यूरोपियन मुलाज़िमों में से, जिनमें अधिकांश
फ्रांसीसी थे, बहुत कम ने हैदर के साथ विश्वासघात किया । जिन
यूरोपियन पादरियों ने ऊपर लिखे फ़तवे पर दस्तख़त किए उनमें
से अनेक हैदर की प्रजा थे और हैदर ने उनके साथ अनेक रिआयतें
कर रक्खी थीं ।
इस समय तक यानी सन् १७६८= के अन्त से पहले पहले हैदर