भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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उसका मुख्य काम यह था कि वह हर विजय के बाद यह देखने
के लिए घर घर घूमता फिरता था कि हैदर के सिपाही सिवाय
नक़दी और अस्त्र शस्त्र ले लेने के प्रजा के साथ किसी तरह का
अत्याचार न करें। इस सराहनीय प्रयत्न में ही पीरज़ादा ख़ाकी
शाह की जान गई। क़िले के अन्दर की अंगरेज़ी सेना ने अपने
कारतूस एक तालाब के अन्दर फेंक दिए और शस्त्रागार को आग
लगा दी। फिर भी हैदर को इस क़िले के अन्दर अंगरेज़ों की १८
पीतल की तोपें, तीन हज़ार बन्दूकें और बहुत कुछ गोला बारूद
और रसद का सामान मिला।
जनरल स्मिथ की सेना अब हार पर हार खाकर पीछे हटती
[पार्श्व टिप्पणी: विश्वासघात के पक्ष] जा रही थी। उसकी सहायता के लिए कर्नल
[पार्श्व टिप्पणी: में ईसाई पादरियों] बुड एक नई सेना सहित बंगाल से रवाना
[पार्श्व टिप्पणी: का फ़तवा] किया गया। इसी समय के निकट हैदर की
सेना में विश्वासघात के बीज बोने का अंगरेज़ों
ने एक ख़ासा षड्यन्त्र रचा। अनेक यूरोपियन उस ज़माने में यूरोप
से आकर अनेक हिन्दुस्तानी नरेशों की फ़ौजों में नौकरियाँ कर लेते
थे। हैदर की सेना में भी अनेक यूरोपियन कई ऊँचे पदों पर
नियुक्त थे। कई कम्पनियाँ फ्रांसीसी सिपाहियों की भी उसकी
सेना में शामिल थीं। अंगरेज़ों ने ईसाई पादरियों के ज़रिए हैदर
के इन तमाम यूरोपियन मुलाज़िमों को फोड़ने की कोशिश की। इस
षड्यन्त्र की कुछ भनक हैदर के कानों तक पहुँच गई। उसने अपने
तमाम यूरोपियन मुलाज़िमों को जमा करके उनकी तनख़ाहें दिलवा