भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३२० भारत में अंग्रेज़ी राज
गोलाबारी के बाद अंगरेज़ी सेना को फ़सील छोड़ कर पीछे हट
जाना पड़ा। अंगरेज़ सेनापति ने विवश होकर सुलह का सफ़ेद
झंडा दिखलाया। हैदर ने लड़ाई बन्द कर दी और क़िले पर क़ब्ज़ा
कर लिया। क़िले के भीतर के तमाम अंगरेज़ सिपाहियों की हैदर
ने जान बख़्श दी और उन्हें इस बात की इजाज़त दे दी कि तुम
लोग अपने हथियार रख कर मद्रास लौट जाओ। कम्पनी के देशी
सिपाहियों को उसने मौक़ा दिया कि तुम लोग चाहे अपने घर
लौट जाओ और चाहे मैसूर की सेना में भरती हो जाओ। ये
हिन्दोस्तानी सिपाही क़रीब क़रीब सब हैदरअली की सेना में
आकर भरती हो गए। हैदरअली ने इस बात का भी हुकुम दे दिया
कि कम्पनी का हर अफ़सर और सिपाही, सिवाय हथियारों, गोले
बारूद, घोड़ों और उस तमाम माल के जो इंगलिस्तान के बादशाह
या अंगरेज़ कम्पनी या नवाब मोहम्मदअली का है, बाक़ी सब
निजी सम्पत्ति अपने साथ ले जा सकता है। क़िले के पराजित
अंगरेज़ सेनापति ने जब हैदरअली से निवेदन किया कि रसद
इत्यादि का बहुत सा सामान मैंने अपने निजी रुपए से ख़रीदा है,
तो उदार हैदरअली ने उसे अपने ख़ज़ाने से उस सामान का दाम
तक दिलवा दिया।
एक ओर हैदरअली का व्यवहार पराजित शत्रु के साथ इतना
उदार था, दूसरी ओर अंगरेज़ों ने इसी युद्ध में
अंगरेज़ों के व्यवहार | हैदरअली के एक छोटे से क़िले धर्मपुरी पर
के साथ तुलना | क़ब्ज़ा करते हुए, उस समय जब कि सुलह का