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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 589

३१८ भारत में अंगरेज़ी राज
को यह कह कर हैदरअली के ख़िलाफ़ फोड़ा कि बारामहल का
इलाक़ा हैदरअली से जीतकर तुम्हें दे दिया जायगा।
अंगरेज़ों का मुक़ाबला करने के लिए हैदरअली ने अब निज़ाम
के साथ सन्धि की। तय हो गया कि निज़ाम और हैदरअली दोनों
की सेनाएँ मिलकर करनाटक और अंगरेज़ी इलाक़े पर हमला करें
और नवाब मोहम्मदअली को दण्ड देने के लिए उसे करनाटक की
मसनद से हटाकर हैदरअली के बेटे टीपू को उसकी जगह बैठा दें।
क़रीब पचास हज़ार सेना निज़ाम की ओर से वज़ीर रुकनुद्दौला के
अधीन हैदरअली की मदद के लिए आई। इतनी ही सेना जनरल
स्मिथ के अधीन मद्रास से बढ़ी। इतने में जब कि अभी अंगरेज़ों
और हैदरअली में पत्र व्यवहार हो ही रहा था, जनरल स्मिथ ने
हैदर के वनियमवाड़ी, कावेरीपट्टम इत्यादि कुछ सरहदी क़िले अपने
अधीन कर लिए। हैदरअली के पास कुल सेना इस समय दो लाख
के क़रीब थी। इसमें से पचास हज़ार सेना लेकर वह जनरल स्मिथ
के मुक़ाबले के लिए बढ़ा। रुकनुद्दौला की सेना भी हैदरअली की
सेना के साथ साथ थी। इस दरमियान अंगरेज़ों ने निज़ाम और
रुकनुद्दौला के साथ गुप्त पत्र व्यवहार शुरू किया। कई जगह ऐन
मौक़े पर रुकनुद्दौला के व्यवहार से दगा का शक होने लगा।
हैदरअली के साथ अंगरेज़ों की कई छोटी बड़ी लड़ाइयाँ हुईं, जिनमें
विजय कहीं अंगरेज़ों की रही और कहीं हैदरअली की। हैदरअली
के मज़बूत क़िलों पर अंगरेज़ कोई विशेष असर न डाल सके। फिर
भी हैदरअली का बहुत सा इलाक़ा अंगरेज़ों के हाथों में आ गया।