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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 588

हैदरअली ३१७
तमाम सिपाहियों को छै छै महीने का वेतन इनाम में दिया, ग़रीबों
और साधुओं में भोजन, वस्त्र, धन बटवाया और बेदनूर का नाम
बदलकर हैदरनगर रख दिया।
इसके बाद और भी नए नए प्रान्तों को विजय कर हैदरअली ने
मैसूर राज की सीमा को बढ़ाया और वहाँ के शासन को सुदृढ़
और व्यवस्थित रूप दिया।
मराठे भी चारों ओर अपना साम्राज्य बढ़ाने के प्रयत्नों में लगे
हुए थे। चार बार उन्होंने मैसूर पर हमला किया, किन्तु इन हमलों
से मराठों को कोई ख़ास लाभ न हो सका। हैदरअली का बल कुछ
कम न था। वह कभी लड़कर और कभी थोड़ा बहुत ज़र ज़मीन
देकर मराठों से छुटकारा पाता रहा। अन्त में जो थोड़ा बहुत
इलाक़ा मराठों ने इस तरह हैदरअली का ले लिया था वह भी उन्हें
वापस लौटा देना पड़ा और दोनों को अपने अपने हित के लिए
एक दूसरे के साथ सन्धि करनी पड़ी।
किसी भी स्वाधीन भारतीय नरेश के इस प्रकार बढ़ते हुए बल
अंग्रेज़ों के साथ को अंग्रेज़ गवारा न कर सकते थे। वे तरह
पहली लड़ाई तरह से हैदरअली को कुचलने की तदबीरें करने
लगे। हैदरअली के साथ उनका पहला युद्ध सन्
१७६७ में शुरू हुआ। छेड़छाड़ अंग्रेज़ों की ओर से हुई। अंग्रेज़ों
ने बिला वजह उस साल हैदर के बारामहल के इलाक़े पर हमला
कर दिया। करनाटक के नवाब मोहम्मदअली के साथ हैदरअली
की इससे पहले ख़ासी मित्रता थी। अंग्रेज़ों ने करनाटक के नवाब