सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 587, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 587

३१६ भारत में अंग्रेज़ी राज
जिस तरह मैसूर का राजा दिल्ली सम्राट के मातहत था, उसी
तरह मैसूर के मातहत अनेक छोटे छोटे सामन्त राजा थे। मैसूर के
अनेक सामन्त उस समय मैसूर के ख़िलाफ़ बगावत कर रहे थे।
इनमें से अनेक के बीच आपसी लड़ाइयाँ जारी थीं। इन सामन्तों
या प्रान्तीय शासकों को अधिकतर पालीगार कहा जाता था।
हैदर ने सेना भेजकर इन सब पालीगारों को वश में किया और
सारे राज में शान्ति और सुशासन क़ायम किया।
इन बाग़ी सामन्तों में मुख्य बेदनूर का राजा था। लिखा है
कि राजधानी बेदनूर की आधी आबादी उस समय ईसाई थी।
बेदनूर के राजा और उसकी विधवा माता में कुछ झगड़ा हुआ।
राजा ने हैदरअली से मदद चाही। बेदनूर की प्रजा भी राजा के
पक्ष में थी। हैदरअली ने राजा का पक्ष लेकर बेदनूर पर चढ़ाई
की, रानी ने बड़ी वीरता के साथ अपने दुर्ग की रक्षा की। अन्त में
रानी की सेना हार गई। हैदरअली ने एक बार रानी और उसके
बेटे में सुलह करवा दी और बेटे के राजतिलक का प्रबन्ध कर दिया।
इसके बाद भी रानी ने बेटे के साथ गुप्त साज़िश करके हैदरअली
को मरवा डालने का प्रबन्ध किया। हैदरअली पर भेद खुल गया।
तहक़ीक़ात के बाद रानी और उसके पुत्र दोनों को उसने क़ैद कर
लिया और उनकी जगह अपने एक आदमी राजाराम को बेदनूर का
शासक नियुक्त कर दिया। बेदनूर की रियासत इतनी धनाढ्य थी
कि क़िले के अन्दर हैदरअली को क़रीब बारह करोड़ रुपए का माल
सोना, चाँदी और जवाहरात मिले। हैदरअली ने इस धन से अपने