भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहैदरअली ३१५
की ख़बर सुन कर उसे मैसूर के पास सीरा प्रान्त का सूबेदार
नियुक्त कर दिया।
मैसूर दरबार की हालत पिछली आपसी लड़ाइयों के सबब उस
[शासन प्रबन्ध] समय ख़ासी बिगड़ी हुई थी। हैदर ने सबसे
[और सुधार] पहले राज की माली हालत की ओर ध्यान दिया।
रियासत के अधिकांश ज़ेवर और जवाहरात
श्रीरंगपट्टन के एक धनाढ्य साहूकार के घर में गिरवी पड़े हुए थे।
साहूकार ने कई मौक़ों पर रियासत को बड़ी बड़ी रक़में क़र्ज़ दी
थीं। रियासत से उसने बेहद धन कमाया था। अपने धन के लिए
वह दूर दूर तक मशहूर था। कहा जाता है कि उसके बच्चों के
पालने ठोस सोने के बने हुए थे और ठोस सोने ही की ज़ञ्जीरों से
लटके रहते थे। हैदरअली ने आज्ञा दी कि उसका क़र्ज़ चुका
दिया जाय और रियासत का सामान उसके यहाँ से ले लिया जाय।
हिसाब की जाँच पड़ताल के लिए पञ्च मुक़र्रर किए गए। पञ्चों
की रिपोर्ट से मालूम हुआ कि साहूकार के हिसाब में काफ़ी बेईमानी
और जालसाज़ी है। पञ्चों ही ने फ़ैसला किया कि साहूकार की
तमाम सम्पत्ति ज़ब्त कर ली जाय और उसे आजन्म क़ैद रक्खा
जाय। हैदरअली ने उसकी सम्पत्ति ज़ब्त कर ली, किन्तु उसे क़ैद
करने के बजाय उसके गुज़ारे के लिए एक पेन्शन नियत कर दी
और उसके बेटों को रियासत के अन्दर अच्छे अच्छे ओहदों पर
नियुक्त कर दिया। मालगुज़ारी की वसूली और राज के ख़र्च का
हैदरअली ने बहुत सुन्दर प्रबन्ध कर दिया।