भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहैदरअली ३११
दिन राजसिंहासन पर बैठेगा, किन्तु साथ ही उसके जन्म के थोड़े
ही दिनों के बाद उसके पिता की मृत्यु हो जायगी। इस पर
फ़तह मोहम्मद के कुछ रिश्तेदारों ने बालक को मार डालना चाहा।
फ़तह मोहम्मद को पता लगा तो उसने स्वयं अपने जीने की परवा
न कर बालक का पक्ष लिया। इस तरह हैदरअली की जान बच
गई और माता पिता ने उसे बड़े प्रेम से पाला।
शहबाज़ और हैदरअली के जन्म से पहले फ़तह मोहम्मद ने
अरकाट की नौकरी छोड़ कर पहले मैसूर में नौकरी की और फिर
वहाँ से छोड़कर सूबा सीरा के नवाब दरगाह कुलीख़ाँ के यहाँ नौकरी
कर ली। सीरा में वह बालापुर कलाँ का क़िलेदार बना दिया गया।
थोड़े दिनों बाद दक्खिन के नरेशों की आपसी लड़ाइयों में फ़तह
मोहम्मद किसी लड़ाई में काम आया। बाप की मृत्यु के समय शहबाज़
की आयु आठ साल की और हैदरअली की आयु ३ साल की थी।
विजयी नवाब अब्बास कुली ख़ाँ ने फ़तह मोहम्मद की बेवा और
उसके यतीम बच्चों का सब माल असबाब ज़ब्त कर लिया और उनके
सम्बन्धियों से अधिक धन वसूल करने के उद्देश से शहबाज़ और
हैदरअली दोनों मासूम बालकों को पकड़ कर एक नगाड़े के अन्दर
बन्द कर दिया और ऊपर से नगाड़े पर चोट लगवानी शुरू की।
हैदरअली का एक चचेरा भाई, जिसका नाम भी हैदर साहब
था और जो हैदरअली के ताऊ शेख़ इलियास का
[पार्श्व टिप्पणी: मैसूर की सेना में] बेटा था, इस समय मैसूर के राजा के यहाँ नायक
[पार्श्व टिप्पणी: भरती होना] था। हैदरअली की माँ ने अपने इस भतीजे को