भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपहला मराठा युद्ध ३०७
न वीरता, युद्धकौशल या ईमानदारी के लिए उनकी कीर्ति बढ़ी।
इसके ख़िलाफ़ मराठों की वीरता, उनका युद्ध
पहले मराठा युद्ध कौशल और नाना फड़नवीस की नीतिज्ञता तीनों
का अन्त इस युद्ध में अत्यन्त उच्च कोटि की साबित
हुईं। इसमें सन्देह नहीं कि यदि गायकवाड़, सींधिया और भोंसले
तीन तीन मराठा नरेशों ने पेशवा दरबार के साथ विश्वासघात न
किया होता, या यदि ऐन मौक़े पर हैदरअली की ज़िन्दगी ने धोखा
न दिया होता, तो हिन्दोस्तान से विदेशी सत्ता, जिसे जड़ पकड़े
श्रभी २० साल भी न हुए थे, उसी समय समूल उखड़ कर फिक
गई होती। किन्तु नाना फड़नवीस की उच्च नीति और दूरदर्शिता
उस समय के दूसरे मराठा नरेशों में मौजूद न थी और इस देश-
को पुनर्जन्म की प्रसव वेदना में से निकलना आवश्यक था।