सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 577, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 577

३०६ भारत में अंगरेज़ी राज
३—राघोबा को २५,०००) रुपए मासिक पेन्शन पर एक जगह
रहने की इजाज़त दी गई।
४—जो सन्धि वारन हेस्टिंग्स ने गोहद के राजा के साथ की
थी वह रद्द ठहराई गई, ग्वालियर माधोजी सींधिया को वापस
मिल गया और गोहद का राना, जिसे अंगरेज़ों ही ने माधोजी के
खिलाफ़ भड़काया था, जिसकी सहायता के बिना कप्तान पोफ़म
माधोजी को कभी भी वश में न कर पाता और बिना माधोजी को
वश में किए पेशवा दरबार के साथ इतनी आसानी से सुलह भी
न हो सकती, अब दण्ड भोगने के लिए अपने शत्रु माधोजी के
हवाले कर दिया गया।
सन्धि पत्र १७ मई को लिखा गया, किन्तु नाना फड़नवीस ने
सात महीने बाद तक उस पर दस्तख़त न किए, क्योंकि नाना का
सच्चा मित्र और अंगरेज़ों का जानी दुशमन हैदरअली अभी तक
अंगरेज़ों से लड़ रहा था। नाना की आशाएँ अभी टूटी न थीं।
इसके अलावा जब तक हैदरअली मैदान में था, नाना का अंगरेज़ों
के साथ सन्धि कर लेना हैदरअली के साथ विश्वासघात करना
होता। अन्त में दिसम्बर महीने में नाना को हैदरअली की मृत्यु
का समाचार मिला। अंगरेज़ों को भारत से निकालने की उसकी
आशाएँ टूट गईं। नाना ने अब सालबाई के सन्धि पत्र पर
दस्तख़त कर दिए
इस तरह ले दे कर पहले मराठा युद्ध का अन्त हुआ। इस
युद्ध से भारत के अन्दर न अंगरेज़ों का ज़रा सा भी इलाक़ा बढ़ा;