भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपहला मराठा युद्ध ३०५
सुलह करवा दें। किन्तु मूदाजी नाना के साथ विश्वासघात कर
अंगरेज़ों की ओर चुका था, उसे फिर नाना के सामने जाने का
से सन्धि की साहस न हो सका। मजबूर होकर हेस्टिंग्स ने
कोशिशें १३ अक्तूबर सन् १७८१ को फिर माधोजी
सींधिया के साथ एक गुप्त सन्धि की और उसी माधोजी द्वारा
नाना फड़नवीस से सन्धि की बातचीत शुरू की।
११ सितम्बर सन् १७८१ को मद्रास की अंगरेज़ कौन्सिल ने
भी हैदर से हार पर हार खाकर एक पत्र द्वारा बड़ी नम्रता के
साथ नाना से सुलह की प्रार्थना की, जिसमें उन्होंने खुदा और
ईसा मसीह के अलावा इंगलिस्तान के बादशाह, अंगरेज़ क़ौम और
कम्पनी तीनों की क़समें खाईं कि हम लोग अब जो सन्धि होगी
उस पर सदा क़ायम रहेंगे।
कई महीने तक पत्र व्यवहार जारी रहा। अन्त में १७ मई
सन् १७८२ को सालबाई नामक स्थान पर पूना
सालबाई की दरबार और कम्पनी के बीच तीसरी बार सन्धि
सन्धि हुई। इस सन्धि के अनुसार—
१—शुरू से अब तक छल से या बल से पेशवा के जितने
इलाक़ों पर अंगरेज़ों ने क़ब्ज़ा कर लिया था वे सब पेशवा दरबार
को वापस दे दिए गए।
२—गायकवाड़ के इलाक़ों और तमाम गुजरात की ठीक वही
स्थिति रही, जो सन् १७७५ से यानी अंगरेज़ों के दख़ल देने से
पहले थी।
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