भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०४ भारत में अंगरेज़ी राज
की नींव रक्खी और दूसरे सूबेदारों के लिए एक बुरी मिसाल
क़ायम की। अंगरेज़ों को भारत के अन्दर अपना राज जमाने में भी
समय समय पर निज़ाम कुल से काफ़ी सहायता मिली।
वारन हेस्टिंग्स ने उस समय के निज़ाम को बहकाया कि दिल्ली
[हाशिया: निज़ाम का विश्वासघात और हैदरअली के अंगरेज़ों पर हमले] सम्राट् तुम्हें दक्खिन की सूबेदारी से हटाकर
हैदरअली को तुम्हारी जगह देना चाहता है।
गुण्टूर का इलाक़ा कुछ समय पहले अंगरेज़ों ही
ने निज़ाम से छीन कर अपने मित्र करनाटक के
नवाब मोहम्मदअली को दे दिया था। हेस्टिंग्स
ने अब वह इलाक़ा निज़ाम को वापस दिलवा दिया। इस तरह
हेस्टिंग्स ने नाना और हैदरअली दोनों के ख़िलाफ़ निज़ाम को
अपनी ओर फोड़ लिया, किन्तु हैदरअली पर वारन हेस्टिंग्स की
चालों का कोई असर नहीं हुआ। उसने नाना का सन्देशा पाते ही
अपने पास के अंगरेज़ों इलाक़ों पर हमला कर दिया। उसकी
विजयों का हाल अगले अध्याय में दिया जायगा। इधर हेस्टिंग्स
को करनल गॉडर्ड की हार का समाचार मिला। इस समाचार को
सुनकर हेस्टिंग्स का साहस एकदम टूट गया। एक ओर हैदरअली
के भयंकर हमले और दूसरी ओर गॉडर्ड की लज्जाजनक हार।
दोनों से घबराकर हेस्टिंग्स ने पेशवा दरबार के साथ तुरन्त सन्धि
कर लेने ही में अपनी ख़ैरियत देखी।
वारन हेस्टिंग्स ने अब नागपुर के मूदाजी भोंसले से प्रार्थना
की कि आप मध्यस्थ बनकर नाना फड़नवीस और अंगरेज़ों में