भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपहला मराठा युद्ध ३०३
हैदरअली एक निर्धन घराने में पैदा हुआ था। केवल अपनी
[हैदरअली और] वीरता और योग्यता के बल वह एक मामूली
[निज़ाम में तुलना] सिपाही से बढ़ते बढ़ते एक विशाल राज का
स्वामी बन गया था। वह प्रजापालक था और
उसकी प्रजा उससे प्रेम करती थी। अपने देश या देशवासियों के
साथ उसने कभी भी दग़ा नहीं की। हैदरअली के चरित्र, अंगरेज़ों
के साथ उसके युद्ध और उसके अद्भुत पराक्रम का बयान अगले
अध्याय में किया जायगा। इसके ख़िलाफ़ हैदराबाद के राजकुल
का संस्थापक निज़ामुलमुल्क दिल्ली का एक चलता हुआ दरबारी
था, जो केवल चालबाज़ियों से बढ़ा और जिसने अपने स्वामी
दिल्ली सम्राट के साथ विश्वासघात करके अपने लिए एक स्वतन्त्र
राज क़ायम किया। जिस समय दोनों प्रसिद्ध भाई सय्यद अब्दुल्ला
और सय्यद हुसेनअली उस 'जज़िये' को, जिसे अकबर ने रद्द कर
दिया था और जिसे औरङ्गज़ेब ने दोबारा जारी किया था, फिर से
रद्द करवा कर तथा अन्य अनेक उपायों से मुग़ल साम्राज्य के नाश
को रोकने के प्रयत्न कर रहे थे, उस समय निज़ामुलमुल्क ने इन
दोनों दूरदर्शी भाइयों के ख़िलाफ़ साज़िशें करके उनकी सत्ता को
नष्ट किया। निज़ामुलमुल्क ने ही मराठों को उकसाकर मुग़ल
साम्राज्य पर उनसे हमले करवाए। निज़ामुलमुल्क ही ने नादिरशाह
को ईरान से बुलवा कर भारत तथा भारत सम्राट दोनों को अपमा-
नित करवाया। निज़ामुलमुल्क ही सम्राट का पहला सूबेदार था,
जिसने अपने सूबे को साम्राज्य से पृथक करके साम्राज्य के अंगभंग