भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०२ भारत में अंगरेज़ी राज
को ग्वालियर का लालच देकर सींधिया के ख़िलाफ़ अपनी ओर
फोड़ लिया। कप्तान पोफ़म के अधीन कम्पनी की एक सेना
ग्वालियर भेजी गई और गोहद के राना की सहायता से ४ अगस्त
सन् १७८० को ग्वालियर का क़िला माधोजी सींधिया से जीत कर
गोहद के राना को दे दिया गया। आज कल के धौलपुर के जाट
राना उसी गोहद के राना की औलाद हैं। इसके बाद करनल
कारनक ने वारन हेस्टिंग्स की आज्ञा से फ़रवरी और मार्च सन्
१७८१ में सींधिया के अनेक स्थानों को रौंदा, उन्हें लूटा और
तबाह किया।
माधोजी को अपने विश्वासघात की काफ़ी सज़ा मिल चुकी
थी। वारन हेस्टिंग्स ने इसके बाद माधोजी का सर्वनाश करने के
लिए राजपूताने के नरेशों को उसके विरुद्ध भड़काना चाहा, किन्तु
माधोजी के सौभाग्य से इसमें हेस्टिंग्स को सफलता न हो सकी।
इतने में हेस्टिंग्स को मालूम हुआ कि अंगरेज़ों के विरुद्ध नाना
फ़ड़नवीस, निज़ाम और हैदरअली में सलाह होगई है। मूदाजी
भोंसले का बंगाल पर हमला हेस्टिंग्स की चालों और मूदाजी के
विश्वासघात द्वारा विफल हो ही चुका था। केवल दो प्रबल शक्तियाँ
मैदान में बाक़ी थीं, निज़ाम और हैदरअली। हेस्टिंग्स ने इन दोनों
को अपनी ओर फोड़ने के भरसक यत्न किए। निज़ाम के साथ
उसे पूरी सफलता हुई, किन्तु हैदरअली को वह अपनी ओर न
फोड़ सका। वास्तव में हैदरअलो और निज़ाम के चरित्र में बहुत
बड़ा अन्तर था।