भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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इस पत्र को पढ़कर ऐसा मालूम होने लगता है मानों वह सन् १८५७
- "मानों": मानों.
- "१८५७": १८५७.
के प्रसिद्ध नाना धोरडुपन्त के हाथ का लिखा हुआ हो । नाना
- As analyzed, "धोरडुपन्त".
Wait, could it be "धोण्डुपन्त"?
Let's look at the transcription conventions: if a letter is clearly a printing error or intended as something, usually in transcription we reproduce what is printed, or note it. Let's look very carefully at "धोरडुपन्त". Yes, it is typed धोरडुपन्त.
फड़नवीस जो बात चाहता था वह न हो सकी । किन्तु उसके
- "फड़नवीस जो बात चाहता था वह न हो सकी । किन्तु उसके"
प्रयत्न बिल्कुल निष्फल नहीं गए ।
- "प्रयत्न बिल्कुल निष्फल नहीं गए ।"
Everything is verified and clear. Output clean markdown with to .३०० भारत में अंगरेज़ी राज
और फिर उसे क़ैद करके स्वयम् उसके राज पर क़ब्ज़ा कर लेते हैं। मिसाल
के तौर पर शुजाउद्दौला, मोहम्मदअली ख़ाँ, अरकाट के सूबे और तञोर के
नरेश इत्यादि की हालत देख लीजिये । इसलिए आपका इन टोपी वालों को
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