भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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(४) जब तक अंगरेज़ इन शर्तों को पूरा न कर दें तब तक के
लिए दो अंगरेज़ अफ़सर बतौर बन्धक मराठों के पास क़ैद रहेंगे।
सन्धि पर बाज़ाब्ता दोनों ओर के सेनापतियों के दस्तख़त हो
गए और कम्पनी तथा पेशवा दरबार दोनों की मोहरें लग गईं।
राघोबा और दो अंगरेज़ मराठों के हवाले कर दिए गए। करनल
गॉडर्ड के नाम पत्र लिखकर पूना दरबार के एक वकील के सुपुर्द
कर दिया गया। नाना फड़नवीस ने राघोबा और उसके साथ
दोनों अंगरेज़ों को माधोजी सींधिया (महादजी सींधिया) के
हवाले कर दिया।
किन्तु अंगरेज़ अब भी अपने छल से बाज़ न आए। बम्बई
[हाशिया: इस] पहुँचते ही उन्होंने उस पत्र को रद्द करने के लिए
[हाशिया: दूसरी सन्धि का] जो हाल की सन्धि के अनुसार मराठा वक़ील
[हाशिया: उल्लङ्घन] की मारफ़त करनल गॉडर्ड के पास भेज दिया
गया था, करनल गॉडर्ड को एक और गुप्त पत्र भेजा और उसमें
लिखा कि आप जितनी जल्दी हो सके बम्बई पहुँच जाइये।
बम्बई की अंगरेजी सेना की हार का समाचार सुनकर करनल
गॉडर्ड पहले सूरत की ओर बढ़ा। ६ फ़रवरी को पूना दरबार का
वक़ील अंगरेज़ सेनापति के पत्र सहित गॉडर्ड से जा मिला। वकील
ने पत्र देकर गॉडर्ड पर बंगाल लौट जाने के लिए ज़ोर दिया।
गॉडर्ड यह झूठ बोल कर कि मेरो सेना का उद्देश पेशवा सरकार
से लड़ना नहीं है, बल्कि उससे मित्रता क़ायम रखना और
फ़्रांसीसियों का मुक़ाबला करना है, बराबर आगे बढ़ता गया।