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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पहला मराठा युद्ध २६१
शुरू किया। उन्होंने स्वयं अपने बहुत से गोले बारूद को आग
लगा दी और भारी तोपों को एक बड़े तालाब
अंग्रेज़ों की दोबारा में फेंक दिया। मराठा सेनापतियों ने अब आगे
हार और दूसरी बढ़कर सामने से शत्रु को रोका और उन्हें चारों
सन्धि ओर से घेर लिया। एक भयङ्कर संग्राम हुआ।
अंग्रेज़ी सेना को दूसरी बार पूरी तरह हार खानी पड़ी। उनके
तमाम अस्त्र शस्त्र छीन लिए गए। पेशवा की सेना उस समय यदि
चाहती तो राघोबा और उसके एक एक देशी और विदेशी साथी
को वहीं पर ख़त्म कर सकती थी, किन्तु अंग्रेज़ों ने हार मान कर
दया की प्रार्थना की। १३ जनवरी को अंग्रेज़ों का एक दूत सन्धि
के लिए मराठों के पास पहुंचा। मराठों ने शरणागत शत्रु को छोड़
दिया। दोनों पक्षों में फिर एक सन्धि हो गई जिसमें अंग्रेज़ों ने
वादा किया कि :-
(१) राघोबा को फ़ौरन पूना दरबार के हवाले कर दिया
जावेगा।
(२) भड़ोच, सूरत और मराठों के जितने और इलाक़ों पर
कम्पनी ने अपना अधिकार जमा रक्खा है वे सब फ़ौरन पेशवा
दरबार को वापस दे दिए जावेंगे।
(३) जो अंग्रेज़ी सेना बंगाल से आ रही है उसे वापस
लौटाने के लिए अंग्रेज़ अफ़सर उस सेना के पास स्पष्ट सन्देशा
भेज देंगे और यह सन्देशा पूना दरबार के एक वकील की मारफ़त
भेजा जावेगा।