भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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इस काम के लिए एक अंगरेज़ दूत एलयाॅट को बरार के राजा
[बरार के राजा को] के पास भेजा गया। एक अंगरेज़ इतिहास लेखक
[फोड़ने के प्रयत्न] लिखता है :—
“मिस्टर एलयाॅट को इस काम के लिए नियुक्त
किया गया कि तुम जाकर बरार के राजा को मराठा मण्डल से फोड़ो।
एलयाॅट के द्वारा बरार के राजा से बातचीत की गई। एलयाॅट को यह अधिकार
दिया गया कि तुम राजा से कह दो कि गवरनर जनरल अपनी पूरी शक्ति से
सतारा के राजा का तमाम इलाक़ा और पेशवा की पदवी आपको दिलवाने के
लिए तैयार है ।”*
किन्तु मूदाजी ने किसी वजह से वारन हेस्टिंग्स की इस सलाह
को स्वीकार न किया। वारन हेस्टिंग्स की चाल पूरी तरह न चल
सकी। इस पत्र व्यवहार से उसे इतना लाभ अवश्य हुआ कि
बंगाल की सेना शान्ति के साथ बरार के इलाक़े से गुज़र सकी।
होलकर और सींधिया दोनों मालूम होता है फ़्रान्सीसी हमले
के धोखे में आगए। इसके अलावा वे उस समय पूना में थे, इस
लिए उन्होंने इस सेना को अपने राज्यों में से गुज़रने की इजाज़त
दे दी।
- “Overtures were made to the Raja of Berar through Mr. Elliot, who
was deputed, with the view of detaching him from the confederacy, and who
was empowered to offer him the full support of the Governor-General in his
claims to the possessions of the Raja of Sattara, and to the situation of
Peshwa.”—Origin of the Pindaries etc., by an Officer in the service of the
Honorable East India Company, 1818.