भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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गुज़रना था। इनमें से भौंसले, होलकर और सींधिया तीनों
महाराष्ट्र मण्डल के सदस्य थे। यदि इन नरेशों को अंगरेज़ी
सेना का असली उद्देश मालूम होता तो उस सेना का पूना तक
पहुँच सकना असम्भव होता। इसलिए वारन हेस्टिंग्स ने इन
तीनों को धोखे में रखने के लिए उनके साथ गुप्त पत्र व्यवहार शुरू
कर दिया।
सबसे पहले उसने इन सब नरेशों पर यह ज़ाहिर किया कि
फ्रान्स की सेना भारत के पच्छिमी तट पर हमला करने वाली है
और बंगाल से कम्पनी की सेना केवल फ्रान्सीसियों से अपने इलाक़े
की हिफ़ाज़त करने के लिए भेजी जा रही है, उसका उद्देश किसी
भारतीय नरेश से युद्ध करना नहीं है। इसके अलावा बरार के
राजा मूदाजी भौंसले के साथ उसने एक और ख़ासी सुन्दर चाल
चली। हाल ही में सतारा के राजा की मृत्यु हो चुकी थी, उसके
कोई औलाद न थी। भौंसले कुल की उत्पत्ति शिवाजी के वंश से
थी। वारन हेस्टिंग्स ने मूदाजी भौंसले को उकसाया कि आप
सतारा की गद्दी पर अपना हक़ जमाइए, कम्पनी आपकी मदद
करेगी। वारन हेस्टिंग्स का मतलब यह था कि सतारा की अधिकार
शून्य गद्दी पर एक प्रबल नरेश को बैठाकर पेशवा दरबार के अधि-
कारों को तोड़ दिया जावे, मराठा मण्डल में फूट डाल दी जावे
और फिर मूदाजी को अवध के नवाब वज़ीर की तरह अपने हाथों
में रक्खा जावे।