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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पहला मराठा युद्ध २८१
राघोबा के नाम, जिसमें वारन हेस्टिंग्स ने राघोबा के प्रति मित्रता
प्रकट करते हुए बम्बई कौन्सिल की समस्त काररवाई का समर्थन
किया। अपटन को हिदायत कर दी गई थी कि यह दूसरा
पत्र केवल उस सूरत में उपयोग करना, जब कि इस बीच किसी
सबब से राघोबा के पक्ष की जीत हो चुकी हो। साथ ही हेस्टिंग्स
ने जो पत्र सखाराम बापू के नाम भेजा, उसमें भी अपनी मित्रता
प्रकट करते हुए पेशवा दरबार से प्रार्थना की कि साष्टी और बसई
अंगरेज़ों ही के पास रहने दिए जायें।
पेशवा दरबार के मन्त्री, जिनमें सखाराम बापू और नाना
[मराठों को] फ़ड़नवीस जैसे नीतिज्ञ मौजूद थे, मामले को खूब
[सन्देह] समझते थे। करनल अपटन ने वारन हेस्टिंग्स
के नाम २ फ़रवरी सन् १७७६ के पत्र में लिखा—
"वे मुझसे हज़ार बार पूछते हैं कि 'आप बराबर इतनी वफ़ादारी की
क़समें क्यों खाते हैं ? बम्बई गवरमेण्ट की छेड़ी हुई लड़ाई को तो आप लोग
बुरा कहते हैं और उस लड़ाई द्वारा जो इलाके आपको मिल गए हैं उन्हें
अपने पास रखने के लिए इतने इच्छुक हैं, यह सब मामला क्या है ?'" *
पेशवा दरबार ने इस बात पर ज़िद की कि अंगरेज़ फ़ौरन
साष्टी और बसई खाली कर दें। मजबूर होकर अपटन ने ७ फ़रवरी

  • "They ask me a thousand times, why we make such professions of
    honor? How disapprove the war entered into by the Bombay-Government,
    when we are so desirous of availing ourselves of the advantages of it?"—
    Colonel Upton to warren Hastings, 2nd Feb. 1776.