भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपहला मराठा युद्ध २६७
समय से ही धीरे धीरे गायकवाड़, भोंसला, होलकर और
सींधिया एक एक कर पेशवा की अधीनता से अपने तईं स्वाधीन
समझने लगे ।
पानीपत के कुछ सप्ताह बाद बालाजी बाजीराव की मृत्यु हो गई।
बालाजी का नाबालिग बेटा माधोराव पेशवा की मसनद पर बैठा
और माधोराव का चाचा रघुनाथ राव, जिसे इतिहास में अधिकतर
राघोबा कहा जाता है और जिनकी सेना ने अफ़ग़ानों से पंजाब
विजय किया था, अपने भतीजे पेशवा का संरक्षक नियुक्त हुआ।
राघोबा अत्यन्त वीर, किन्तु अदूरदर्शी था। वह महत्वाकांक्षी भी
था और महत्वाकांक्षा ने उसकी नीतिज्ञता पर और भी परदा डाल
दिया था। इसीलिए जब अंगरेज़ों ने अपने मतलब के लिए मराठों
की सत्ता को नष्ट करने का विचार किया, तो राघोबा आसानी से
उनके हाथों में खेल गया।
कम्पनी की सत्ता उन दिनों भारत में बढ़ती जा रही थी।
[हाशिया: दक्खिन में कम्पनी] मराठों जैसी प्रबल भारतीय शक्ति के अस्तित्व को
[हाशिया: की नीति] अंगरेज़ अपनी उन्नति के लिए हितकर न समझ
सकते थे। एक न एक दिन इन दोनों शक्तियों का
एक दूसरे से टकरा जाना अनिवार्य था।
प्रसिद्ध इतिहास लेखक ग्राण्ट डफ़ लिखता है कि उस
समय—
“कम्पनी के डाइरेक्टर इस बात के लिए इच्छुक थे कि मराठों की बढ़ती
हुई सत्ता को किसी तरह धक्का पहुँचे, और यदि देश की दूसरी शक्तियाँ