भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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कर मार डाला जाता था। औरतों की टाँगों को सरे बाज़ार
शिकओं में कस कर छोड़ दिया जाता था। × × × लोगों के
दिल अत्यन्त सख़्त हो गए थे × × × गाँव के लोगों के मकान
झोपड़े होते थे जिन पर फूस छाया हुआ होता था। × × ×
लन्दन में मकान अधिकतर लकड़ी और प्लास्टर के होते थे,
गलियाँ इतनी गन्दी होती थीं कि बयान नहीं किया जा सकता।
शाम होने के बाद डर के मारे कोई अपने घर से न निकलता
था, क्योंकि जो चाहे अपने ऊपर के कमरे से खिड़की खोल कर
बेखटके गन्दा पानी नीचे फेंक देता था। × × × लन्दन की
गलियों में लालटेनों का कहीं निशान न था। उच्च श्रेणी के लोगों
में सदाचार की आमतौर पर यह हालत थी कि उनमें यदि कोई
भी मनुष्य मरता था तो लोग यही समझते थे कि किसी ने ज़हर
देकर मार डाला × × × सारे देश पर दुराचार की एक बाढ़
आई हुई थी।”
विचार स्वातंत्र्य के विषय में ड्रेपर लिखता है—
ऑक्सफ़ोर्ड की विद्यापीठ ने यह आज्ञा दे दी कि बकेनन,
मिल्टन और बेक्सटर की राजनैतिक पुस्तकें स्कूलों के आँगनों में
खुले जला दी जायें। × × × राजनैतिक या धार्मिक अपराधों
के बदले में जिस तरह की सख़्त सज़ाएँ दी जाती थीं उन पर
बिश्वास होना कठिन है। लन्दन में टेम्स नदी के पुराने टूटे हुए
पुल पर इस तरह के अपराधियों के डरावने सिर काट कर लटका
दिए जाते थे, इसलिए कि उस भयङ्कर दृश्य को देख कर जन