सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 520, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 520

२५८ भारत में अंगरेज़ी राज
आगे चलकर कोलब्रुक लिखता है :—
“वारन हेस्टिंग्स की कूटनीति और उसके निर्लज्ज
गोरखपुर के विश्वासघात का प्रभाव केवल राजाओं और बड़े लोगों
अत्याचार पर ही नहीं पड़ा । ज़मींदारों की ज़मींदारियाँ छीन लेना,
बेगमों को लूटना, रुहेलों को निर्वंश कर डालना, ये सब भूले जा सकते हैं,
किन्तु जो अत्याचार उसने गोरखपुर में किए वे सदा के लिए ब्रिटिश जाति
के नाम पर एक कलङ्क रहेंगे ।”*
गोरखपुर के इन अत्याचारों के विषय में जेम्स मिल लिखता है
कि सन् १७७८ में वारन हेस्टिंग्स ने अपने एक अफ़सर करनल
हैनेवे को कम्पनी की नौकरी से निकाल कर अवध के नवाब के यहाँ
भेज दिया। नवाब पर ज़ोर देकर बहराइच और गोरखपुर के
ज़िलों का दीवानी और फ़ौजी शासन करनल हैनेवे को दिलवा
दिया गया । मिल लिखता है कि—“यह तमाम इलाक़ा नवाब के
शासन में खूब खुशहाल था, किन्तु करनल हैनेवे के अत्याचारों के
कारण तीन साल के अन्दर यह तमाम इलाक़ा वीरान हो गया ।”

  • "It was Mr. Hastings who filled the country with collectors and
    judges who adopted one pursuit- a fortune. These harpies were no sooner
    let loose upon the country, than they plundered the inhabitants with or
    without pretences. . . . Justice was dealt out to the highest bidders by
    the Judges, and thieves paid a regular revenue to rob with impunity. . . .
    "Nor did his crooked politics and shamless breach of faith affect none
    but the princes and great men; the deposition of zemindars, the plundering
    of Begums, the extermination of the Rohillas may be forgotten, but the
    cruelties acted in Gorukhpore will for ever be quoted to the dishonor of the
    British name."—Colebrooke in a private letter to his father, dated 28th
    July, 1788.