भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंऊपर” कमा चुका था। वास्तव में हेस्टिंग्स के ख़िलाफ़ नन्दकुमार
की शिकायतें झूठी न थीं। हमें यह भी याद रखना चाहिये कि डेढ़
सौ साल पहले भारत के अन्दर चालीस लाख रुपए की उतनी
क़ीमत थी जितनी आज आठ करोड़ की, और ‘चालीस लाख’ के
आदमी उन दिनों इंगलिस्तान में इतने ही कम थे जितने आठ
करोड़ के आज दिन भारत में।
वारन हेस्टिंग्स जिस तरह रिश्वतें लेता था उसी तरह देता
[हाशिया: कम्पनी के] और दिलवाता भी था। उसके अनेक छोटे और
[हाशिया: कर्मचारियों द्वारा] बड़े काले और गोरे दलाल कम्पनी की अमलदारी
[हाशिया: देश व्यापी लूट] भर में तमाम महकमों के अन्दर फैले हुए थे, जो
देशी नरेशों और भारतीय प्रजा दोनों को तरह
तरह से लूटते थे और उन पर तरह तरह के अत्याचार करते थे।
कोलब्रुक नामक अंगरेज़ ने २८ जुलाई सन् १७८८ को एक
पत्र भारत से इंगलिस्तान अपने पिता के नाम भेजा, जिसमें उसने
लिखा :—
“मिस्टर हेस्टिंग्स ने इस देश को ऐसे कलक्टरों और जजों से भर दिया
है, जिनके सामने एक मात्र लक्ष्य धन कमाना है। ज्योंही ये गिद्ध मुल्क
के ऊपर छोड़े गए, उन्होंने कहीं कोई बहाना निकाल कर और कहीं बिना
किसी बहाने के देशवासियों को लूटना शुरू कर दिया। × × × जज लोग
मुक़दमे का फ़ैसला उसके हक़ में करते हैं जो उन्हें सबसे ज़्यादा रुपए देता
है। और चोर निर्विघ्न डाके डालने के बदले में बाज़ाब्ता सालियाना अदा
करते हैं।”
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