भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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दिया जाता है। इनका उद्देश था बंगाल के राज शासन से धीरे
धीरे भारतीय अंश को मिटा देना।
कम्पनी के डायरेक्टर अब वारन हेस्टिंग्स पर बार बार ज़ोर दे
[निरपराध रुहेलों] रहे थे कि जिस तरह हो सके अधिक से अधिक
[का संहार] धन भारत से वसूल करके इंगलिस्तान भेजा जावे।
वारन हेस्टिंग्स ने भी, लार्ड मैकॉले के शब्दों में
—"चाहे ईमानदारी से हो और चाहे बेईमानी से, जिस तरह हो
सके, धन बटोरने का निश्चय कर लिया।"* देश की स्थिति का
उसे पूरा ज्ञान था और सूझ की भी उसमें कमी न थी।
सब से पहले वारन हेस्टिंग्स की नज़र रुहेलखण्ड की ओर
गई। अवध की उत्तर-पश्चिम सरहद पर रुहेले पठानों का स्वतन्त्र
राज था। इतिहास लेखक मिल लिखता है :—
"एशिया भर में जिन देशों का शासन सबसे अच्छा था, उनमें से एक
रुहेलखण्ड का इलाक़ा था। वहाँ की प्रजा सुरक्षित थी, उनके उद्योग धन्धों
को राज की ओर से सहायता दी जाती थी और देश में बराबर खुशहाली
बढ़ती जाती थी। इन उपायों द्वारा और अपने पड़ोसियों का देश विजय
करने के स्थान पर यत्नपूर्वक सबके साथ मेल जोल बनाए रख कर उन
लोगों ने अपनी स्वाधीनता को क़ायम रक्खा था।"†
- "The object of Mr. Hastings' diplomacy was at this time simply to
get money . . . by some means, fair or foul."—Critical and Historical
Essays by Lord Macaulay, vol. iii, p. 244.
† "Their territory was one of the best governed in Asia; the people
were protected, their industry encouraged, and the country flourished steadily.