भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवारन हेस्टिंग्स २४३
अवध के नवाब के साथ रुहेलों की सन्धि हो चुकी थी, जिसका
ये लोग सदा ईमानदारी के साथ पालन करते थे। अंगरेज़ों के
साथ रुहेलों का कोई किसी तरह का झगड़ा न था और न "झगड़े
का कोई छोटे से छोटा बहाना ही अंगरेज़ों को मिल सकता था।"*
फिर भी वारन हेस्टिंग्स ने सन् १७७३ ई० में रुहेलों के विरुद्ध
नवाब शुजाउद्दौला के साथ एक गुप्त सन्धि कर डाली। इस सन्धि
में यह तय हो गया कि कोई मुनासिब बहाना मिलते ही कम्पनी
और नवाब की सेनाएँ मिलकर रुहेलखंड पर चढ़ाई करेंगी। रुहेला
जाति को "निर्मूल" † कर उनका देश शुजाउद्दौला के हवाले कर
दिया जावेगा। और इस उपकार के बदले में शुजाउद्दौला चालीस
लाख रुपए नक़द और युद्ध का सारा ख़र्च कम्पनी को अदा करेगा।
मिल के इतिहास से मालूम होता है कि शुजाउद्दौला ने अपनी इच्छा
के विरुद्ध विवश होकर इस सन्धि को स्वीकार किया। इतिहास
लेखक टॉरेन्स लिखता है कि—"१७ अप्रैल सन् १७७४ को इस
ज़बरदस्त अन्याय में एक दूसरे को मदद देने वाली दोनों सेनाओं
ने रुहेलखंड में प्रवेश किया। रुहेले वीर थे, किन्तु उनकी संख्या
बहुत कम थी। उन्होंने रहम की प्रार्थना की, किन्तु व्यर्थ।" मजबूर
होकर उन्होंने वीरता के साथ मुक़ाबला किया, किन्तु क्या हो
By these cares, and by cultivating diligently the arts of neutrality, and not
by conquering from their neigbours, they provided for their independence."—
Mill's History of India, Book v. Chap. i.
- "We had not the slightest pretence of quarrel with the Rohillas." -
Torrens' Empire in Asia, p. 111.
† "The Rohillas should be exterminated." — Warren Hastings' letters.