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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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२४० भारत में अंगरेज़ी राज
देता। अन्त में ये रक़में जमा करके उस अंगरेज़ को दे दी जाती
थीं। *
वारन हेस्टिंग्स के समय में हिन्दोस्तान के अन्दर कम्पनी का
इलाक़ा नहीं बढ़ा। फिर भी वारन हेस्टिंग्स का शासन काल ब्रिटिश
भारत के इतिहास में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। क्लाइव ने
इस देश के अन्दर अंगरेज़ी शासन की जो बुनियाद डाली थी,
वारन हेस्टिंग्स ने भारत की राज शक्तियों को और अधिक कमज़ोर
करके उस बुनियाद को पक्का कर दिया।
मालूम होता है कि इस समय तक अंगरेज़ भारतीय शासन का
सब कारबार सीख चुके थे। वारन हेस्टिंग्स ने सब से पहला काम
यह किया कि क्लाइव की क़ायम की हुई दो अमली का अन्त करने
के लिए उसने मोहम्मद रज़ा ख़ाँ और शिताबराय दोनों नायबों पर
ग़बन और ख़यानत के इलज़ाम लगाकर उन्हें क़ैद कर लिया।
मोहम्मद रज़ा ख़ाँ को फँसाने के लिए वारन हेस्टिंग्स ने राजा नन्द-
कुमार को अपनी ओर फोड़ा। नन्दकुमार को यह लालच दिया
गया कि रज़ा ख़ाँ की जगह तुम्हें बंगाल का नायब बना दिया
जावेगा। इस लालच में आकर नन्दकुमार ने मोहम्मद रज़ा ख़ाँ
को दोषी साबित करने में अंगरेज़ों को काफ़ी मदद दी। "सीअरुल-
मुताख़रीन" में लिखा है कि महाराजा शिताबराय को भी धोखा
देकर गिरफ़्तार किया गया।
कलकत्ते लाकर इन दोनों हिन्दोस्तानी शासकों के मुक़दमों की


  • Seir, vol. iii, pp. 65, 66, Calcutta Reprint.