सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 496, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 496

२३६ भारत में अंगरेज़ी राज
अन्न के काल और महामारी में घनिष्ट सम्बन्ध है। इसी समय
बंगाल भर में चेचक की महामारी फैली, जिससे न बच्चा बच
सका और न बूढ़ा, न पुरुष बच सके और न स्त्री, किन्तु अंगरेज़ों ने
न चावल के व्यापार का ठेका अपने हाथों से छोड़ा और न मुँह
माँगी क़ीमतों में कमी की।
कम्पनी के डायरेक्टरों ने १८ दिसम्बर सन् १७७१ के पत्र में
स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया है कि इस अवसर पर कम्पनी के
मुलाज़िमों ने चावल और दूसरे अनाज के व्यापार पर अपना
अनन्य अधिकार जमा रक्खा था, जिसके सबब से देश भर में चारों
ओर अन्न का अभाव दिखाई देता था।
बंगाल में ईस्ट इण्डिया कम्पनी की सत्ता का इस प्रकार प्रारम्भ
खून के आँसू हुआ। कलकत्ते के विक्टोरिया मेमोरियल में १७वीं
सदी के शुरू का बना हुआ संगमूसा का वह
सुन्दर तख़्त अभी तक रक्खा है, जिस पर मुर्शिदाबाद के सूबेदार
बैठा करते थे। इसी तख़्त पर बैठकर अलीवर्दी ख़ाँ और सिराजुद्दौला
ने बंगाल पर शासन किया। इसी तख़्त पर प्लासी के संग्राम के
बाद क्लाइव ने मीर जाफ़र को बैठाकर तीनों प्रान्तों का सूबा कह कर
सलाम किया। इसी तख़्त पर बैठकर मीर क़ासिम ने बंगाल की
स्वाधीनता की रक्षा के अन्तिम प्रयत्न किए।
विक्टोरिया मेमोरियल के सूची पत्र में पृष्ठ ४० पर लिखा है
कि अभी तक ख़ून के से रंग की लाल बूँदें इस तख़्त के कई हिस्सों