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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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२३२ भारत में अंग्रेज़ी राज
नियुक्त हुआ। किन्तु क्लाइव के जाने के समय से वारन् हेस्टिंग्स
की नियुक्ति के समय तक उत्तरीय भारत में कोई भी महत्त्व की
राजनैतिक घटना नहीं हुई।
‘सीअरुल-मुताख़रीन’ में विस्तार के साथ बयान किया गया
है कि किस तरह उन दिनों बंगाल के तीनों प्रान्तों में अलग अलग
शिताबराय, मोहम्मद रज़ा ख़ाँ और जसारत ख़ाँ कम्पनी के नायबों
की हैसियत से सारा काम करते थे, उनके साथ बैठकर और हर
ज़िले में छोटे से छोटे देशी अफ़सरों के पास बैठकर अंग्रेज़
माल के महकमे का सारा काम सीखते थे और देश के रस्म
रिवाज की जानकारी प्राप्त करते थे और फिर उन्हीं से सीखकर
उन्हीं पर हावी रहते थे, या उन्हें निकाल कर उनकी जगह ले
लेते थे।
इस दो अमली ने तीनों प्रान्तों का सत्यानाश कर डाला। चारों
[हाशिया: दो अमली द्वारा] ओर अराजकता थी। हर समय हर एक को जान
[हाशिया: बंगाल का नाश] और माल का ख़तरा था। हर तरह की तिजारत
पर अंग्रेज़ों का अनन्य अधिकार था। देश के
समस्त उद्योग धन्धे, जिन्हें कुछ ही वर्ष पहले संसार चकित होकर
देखता था, कुचल कर मटियामेट कर दिए गए थे सोना, चाँदी,
जवाहरात, रुपए और अशर्फ़ियाँ लद लद कर देश से बाहर जाने
लगीं, यहाँ तक कि देश में रुपया दिखाई देना तक कठिन हो गया।
बोल्ड्स नामक अंग्रेज़ ने विस्तार के साथ बयान किया है कि किस
प्रकार अंग्रेज़ दलालों ने बंगाल की फली फूली कारीगरियों का