भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 493, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंमीर जाफ़र की मृत्यु के बाद २३३
नाश कर डाला।* इसी अपराध के दंड में बोल्ट्स को भारत से
देश निकाला दे दिया गया।
गवरनर वेरैलस्ट के एक पत्र से मालूम होता है कि अंगरेज़ों के
अधिकार से पहले बंगाल की बनी हुई चीजें हिन्दोस्तान के कोने
कोने में और पच्छिम में ईरान और अरब की खाड़ियों और पूरब
में चीन इत्यादि के समुद्रों में होकर दूर दूर के देशों में पहुँचती थीं
और "हज़ारों रास्तों से धन बह बह कर" बंगाल में आता था,
किन्तु अब वह सब रास्ते बन्द हो गए। यूरोप की कम्पनियाँ जो
भारतीय माल हर साल जहाज़ों में भर कर अपने देशों को ले जाती
थीं उस माल के बदले में एक पैसा यूरोप से भारत न आता था।
इस माल की पूरी क़ीमत बंगाल ही से वसूल की जाती थी।
अपना भारत के दूसरे प्रान्तों का ख़र्च यहाँ तक कि अपनी चीन
की बस्तियों तक का ख़र्च अंगरेज़ बंगाल ही से वसूल करते थे।
व्हीलर नामक अंगरेज़ लिखता है :—
"तीन साल के अन्दर पचास लाख पाउण्ड (पाँच करोड़ रुपए) से ऊपर
का सोना चाँदी बंगाल से विदेशों को गया, जबकि क़रीब पाँच लाख
पाउण्ड (पचास लाख रुपए) का सोना चाँदी बाहर से बंगाल आया। इसी
समय के अन्दर एक रुपए की क़ीमत दो शिलिंग छै पेन्स हो गई।"*
- Consideration of the Affairs of the East India Company, by Bolts.
- "During three years the exports of bullion from Bengal exceeded
five millions sterling, whilst the imports of bullion were little more than half
a million. Meantime the rupee rose to an exchange'value of two and six
pence." Early Records of British India, by Wheeler, p. 375.