भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवे और हम २३
और किन उपायों द्वारा अंगरेज़ों का राज भारत में क़ायम हुआ, भारत के
लिए उसके क्या नतीजे हुए और भविष्य में उससे छुटकारा पाने की किस
तरह आशा की जा सकती है ।
वे और हम
१७ वीं सदी का इंगलिस्तान
वास्तव में भारत और इङ्गलिस्तान का सम्पर्क दो अलग अलग सभ्य-
ताओं और अलग अलग आदर्शों का एक दूसरे से टकराना था । इसलिए
और बातों से पहले हम उस समय के इङ्गलिस्तान की हालत का, जब कि
हिन्दोस्तान और इङ्गलिस्तान का पहली बार सम्पर्क हुआ, संक्षिप्त बयान दे
देना चाहते हैं ।
१६ वीं और १७ वीं सदी के इंगलिस्तान की हालत को बयान करते
हुए प्रसिद्ध इतिहासज्ञ ड्रेपर लिखता है—
“किसानों की झोपड़ियाँ नरसलों और छड़ियों की बनी हुई
होती थीं जिनके ऊपर गारा फेर दिया जाता था । घर में आग
घास जला कर तैयार की जाती थी और धुएँ के निकलने के लिए
कोई जगह न होती थी । जिस तरह का सामान उस समय के
एक अंगरेज़ किसान के घर में होता था, और जिस तरह से वह
ज़िन्दगी बसर करता था, उससे मालूम होता था कि गाँव के
पास नदी के किनारे जो ऊदबिलाव मेहनत से माँद बना कर