भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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है कि भारत के इन मुसलमान शासकों में सिवाय अय्याशी, लूट मार
और धर्मान्धता के और कोई विशेषता न थी। यहाँ तक कि बड़े से बड़े या
अच्छे से अच्छे मुग़ल बादशाहों को हिन्दुओं और हिन्दोस्तान के लिए
अधिक से अधिक 'मीठी छुरी' कह कर बयान किया जाता है। हमें विश्वास
दिलाया जाता है कि मुसलमानों ने कोई भी उपकार भारत पर नहीं किया,
उनके शासन में कोई बात तारीफ़ की न थी, उन्होंने भारत के राष्ट्रीय
जीवन को हर तरह से नुक़सान पहुँचाया और आज तक हिन्दुओं और
मुसलमानों में कभी भी वास्तविक मेल न हुआ और न हो सकता है। जो
इतिहास स्कूलों में पढ़ाए जाते हैं उनमें दिखाया जाता है कि अंगरेज़ों के
कर लेना पड़ा और उसने कहा भी—'I trust that this false
report will not again be revived.' यानी 'मैं विश्वास करता
हूं कि इस झूठी अफ़वाह को अब कोई न दोहराएगा।'
इसी तरह के और भी बेशुमार झूठ उन दिनों जरमनों के विरुद्ध
अंगरेजों और मित्र राष्ट्रों की ओर से प्रकाशित होते रहते थे ।
ऐसी ही एक दूसरी पुस्तक "फ़ाल्सहुड इन वार टाइम" इंगलिस्तान
की पार्लिमेण्ट के मेम्बर आर्थर पॉन्सन्बी ने हाल में प्रकाशित की है।
पॉन्सन्बी इंगलिस्तान के मन्त्रिमण्डल में वैदेशिक विभाग का उपमन्त्री रह
चुका है। इस पुस्तक की आलोचना करते हुए पार्लिमेण्ट के एक दूसरे
प्रसिद्ध सदस्य बिलफ़्रेड वेलॉक ने अगस्त सन् १६२८ के "विशाल-भारत"
में लिखा है—
"इस पुस्तक में यह बात अकाट्य प्रमाणों द्वारा सिद्ध की गई है
कि पिछले महायुद्ध का सञ्चालन झूठ और फ़रेब के ज़रिये किया गया था