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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 47

लेखक की कठिनाइयां २१
आने से पहले भारत में चारों ओर कुशासन और अराजकता '
और आए दिन आपसी लड़ाइयाँ होती रहती थीं, अंगरेज़ों ने, जो उस
समय भारतवासियों से कहीं अधिक सभ्य थे, भारत में आकर शान्ति और
सुशासन क़ायम किया और देश को सभ्यता की ओर ले जाना शुरू किया।
इन्हीं सब बातों के आधार पर और वर्त्तमान अंगरेज़ी सत्ता के सच्चे रूप को
हमसे छिपा कर हमें यह यक़ीन दिलाया जाता है कि अंगरेज़ों का भारतीय
शासन भारतवासियों के लिए एक बहुत बड़े सौभाग्य की चीज़ है और
हमारी सारी भावी उन्नति तथा देश की शान्ति अंगरेज़ी शासन के इस देश
में बने रहने पर निर्भर है। यदि आज दुर्भाग्यवश अंगरेज़ी शासन भारत से
मिट जाय तो सम्भव है कि या तो पश्चिमोत्तर की ओर से कोई दूसरी शक्ति
आकर भारत पर क़ब्ज़ा कर ले या हिन्दू और मुसलमान एक दूसरे से लड़
लड़ कर देश को फिर बरबादी की ओर ले जायँ !
इन सब बातों के जवाब में हम यह दिखलाने का प्रयत्न करेंगे कि
और आरम्भ से लेकर अन्त तक युद्ध के उद्देश्यों के विषय में संसार की
जनता को धोखे में रक्खा गया।”
"यदि संसार में कोई युद्ध ऐसा हुआ है, जो ऊपर से देखने में धर्म के
भावों से प्रेरित मालूम होता था, तो वह पिछला महायुद्ध था। कम से कम
मित्र दल वाले यही कहते थे कि हम धार्मिक युद्ध कर रहे हैं । मित्रों की
ओर से यह एलान किया गया था कि हम लोग छोटी छोटी जातियों की
स्वाधीनता के लिए और सन्धियों की पवित्रता की रक्षा के लिए युद्ध कर रहे
हैं । हमारा उद्देश सैनिक शासन ( Militarism ) को दूर करना है !
“कैसी धोखेबाज़ी थी ! कैसा पाखण्ड था ! कैसा झूठ था !”