भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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लेखक की कठिनाइयां १६
हमलों से अपनी रक्षा नहीं कर सका और एक दूसरे के बाद लगातार
मुख़्तलिफ़ विदेशी शासनों का शिकार होता रहा है। कहा जाता है कि
इस तरह के विदेशी हमलों में भारत के ऊपर सबसे अधिक भयङ्कर हमला
मुसलमानों का था। भारत के मुसलमान आक्रमक असभ्य, धर्मान्ध और
अन्यायी थे, जिन्होंने अंगरेज़ों के आने से पहले क़रीब एक हज़ार साल तक
भारतवर्ष को अपने अत्याचारों से कुचले रक्खा; प्राचीन हिन्दू धर्म और
हिन्दू संस्कृति का सत्यानाश कर डाला और हमारे करोड़ों देशवासियों को
तलवार के ज़ोर से धर्मभ्रष्ट कर मुसलमान बना लिया। हमसे कहा जाता
गये हैं, उनकी जीविका का प्रबन्ध कर दिया जाय। इस दूत को एक भी
इस तरह का बालक नहीं मिल सका। जिन दिनों मैं इतालिया सरकार का
प्रधान मन्त्री था, मैंने और मिस्टर लायड जार्ज ने मिल कर इन भीषण
इलज़ामों की सत्यता का पता लगाने के लिए विस्तृत छान बीन की। इनमें
से कम से कम कई इलज़ामों के साथ मनुष्यों और स्थानों के नाम तक हमें
बताये गये थे। किन्तु हमारे छान बीन करने पर ये तमाम क़िस्से झूठे
निकले।"—"विशाल भारत" अगस्त १६२८ ।
एक दूसरी बात यह भी कही गई थी कि जरमनी में एक कारख़ाना
खुला है, जिसमें सिपाहियों की लाशों को उबाल कर उनसे साबुन और
ग्लिसरीन बनाया जाता है। इस कारख़ाने के फ़ोटो तक अंगरेज़ी अख़बारों
में छपे थे। "सन् १६२५ में जाकर इस असत्य समाचार की पोल खुली।
जरमन सरकार ने एलान किया कि यह एक बिलकुल झूठा क़िस्सा है और
इसमें सच का नामनिशान तक नहीं। आखिर इंगलिस्तान के वैदेशिक
विभाग के मन्त्री सर आस्टिन चैम्बरलेन को जरमनी का यह कथन स्वीकार