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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 458

२०४ भारत में अंग्रेज़ी राज
और जिसे चाहा बैठा दिया । आप लोगों ने दरबार के आदमियों को अपने
यहाँ क़ैद कर लिया और शहनशाह की हुकूमत को तौहीन और उसकी
बेइज़्ज़ती की, आपने देश के व्यापारियों की तिजारत को बरबाद कर दिया,
बादशाह के बाग़ियों को अपने यहाँ पनाह दी, दरबार की आमदनी को
नुक़सान पहुँचाया और अपने ज़ुल्म से मुल्क के बाशिन्दों को पामाल किया ।
आप लोग अभी तक कलकत्ते से नई नई फ़ौजें भेज कर शाही इलाक़ों पर
लगातार हमले करते रहते हैं, यहाँ तक कि इलाहाबाद के सूबे के कई गांव
और परगनों को भी आप लोगों ने लूट लिया है; इन सब नाजायज़ हरकतों
की क्या वजह समझी जा सकती है, सिवाय इसके कि आपको दरबार की
क़तई परवा नहीं और आप खुद मुल्क पर क़ब्ज़ा करने की बेजा कोशिशों में
लगे हुए हैं ?
"अगर आपने यह सब अपने बादशाह के हुकुम या कम्पनी की हिदायत
से किया है, तो मेहरबानी करके मुझे पूरा पूरा हाल बताइए, ताकि मैं उसका
मुनासिब इलाज कर सकूँ, लेकिन अगर इन शरारतों की वजह आपकी
अपनी ही बेजा ख़्वाहिशें हैं, तो आइन्दा ऐसी हरकतों से बाज़ रहिए; हुकूमत
के कामों में दख़ल न दीजिए, हर जगह से अपने आदमियों को हटा कर उन्हें
अपने मुल्क को वापस भेज दीजिए, पहले की तरह कम्पनी की तिजारत जारी
रखिए और महज़ तिजारती कारबार तक ही अपने तईं महदूद रखिए ।
अगर आप इस तरह रहना चाहें तो शाही दरबार हमेशा से ज़्यादा आपकी
तिजारत में मदद देगा और आपके साथ रिआयतें करेगा । किसी ऊँचे दरजे
के ओहदेदार को बतौर अपने वकील के यहाँ भेज दीजिए, जो तमाम हालात
की मुझे ठीक ठीक इत्तला दे, ताकि मैं उसके मुताबिक़ अमल कर सकूँ ।