भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंफिर मीर जाफ़र २०३
बुन्देलखण्ड पर चढ़ाई की और शीघ्र ही वहाँ के राजा को अधीन
कर लिया। राजा ने तमाम पिछला खिराज श्रंदा करने का वादा
किया। मीर क़ासिम इलाहाबाद लौट आया। सम्राट और उसका
वज़ीर मीर क़ासिम की इस सेवा से इतने ख़ुश हुए कि उन्होंने
तुरन्त अंगरेज़ों के विरुद्ध बंगाल पर चढ़ाई करने की तैयारी शुरू
कर दी। सम्राट की इस चढ़ाई का स्पष्ट उद्देश मोर क़ासिम को
फिर से मसनद पर बैठाना था।
किन्तु चढ़ाई करने सं पहले अंगरेज़ों को इसकी सूचना देना
और उनसे जवाब तलब करना ज़रूरी था।
अंगरेज़ों के नाम नवाब वज़ीर शुजाउद्दौला ने इस समय सम्राट
शुजाउद्दौला का की श्रोर से नीचे लिखा पत्र अंगरेज़ गवर्नर
पत्र और उसकी कौन्सिल के नाम कलकत्ते भेजा :—
“हिन्दोस्तान के पिछले बादशाहों ने अंगरेज़ कम्पनी को महसूल माफ़
कर दिया, उन्हें बहुत सी बस्तियाँ और कोठियाँ अता कीं और उनके तमाम
कारबार में मदद की। इस तरह उन्होंने कम्पनी पर इतनी मेहरबानियों की
हैं और उसकी इतनी इज़्ज़त बढ़ाई है, जितनी न अपने मुल्क के व्यापारियों
के साथ कीं और न किसी दूसरी यूरोपियन क़ौम के साथ। इसके अलावा
हाल ही में बादशाह ने मेहरबानी करके मुनासिब से ज़्यादा ख़िताब और
रुतबे और उसके बाद जागीरें और दूसरी रिआयतें आप लोगों को अता की
हैं। बावजूद इन सब इनायतों के आप लोगों ने बादशाह के मुल्क में दख़ल
दिया, बर्धमान, चटग्राम वगैरह सरकारी इलाक़ों पर क़ब्ज़ा कर लिया और
बिना दरबार की रज़ामन्दी के जिस नवाब को चाहा मसनद से उतार दिया