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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 455

फिर मीर जाफ़र २०१
७—पटना, मुंगेर इत्यादि के क़िलों में अंगरेज़ों के आदमी
ज़बरदस्ती घुसे बैठे हैं और मेरी एक नहीं सुनते।
८—बंगाल के गंजों (मंडियों) और गोलों में कई अंगरेज़ों के
आदमी ज़बरदस्ती नाज ख़रीद लेते हैं और जिस तरह चाहते बेचते
हैं, यहाँ तक कि मेरे फ़ौजदारों को फ़ौज की आवश्यकताओं के
लिए भी नाज नहीं मिलता।
६—पटने के अन्दर क़रीब चालीस मकानों पर, जो मुसाफ़िरों के
लिए बने हैं, कुछ अंगरेज़ों ने क़ब्ज़ा कर लिया है, यहाँ तक कि मुझे
अपने और अपने कुटुम्बियों के ठहरने के लिए भी जगह न मिल सकी।
१०—पूर्णिया की लकड़ी की मंडी से मुझे पचास हज़ार रुपए
साल वसूल होते थे। अब अंगरेज़ों ने उस पर क़ब्ज़ा कर लिया है
और मुझे एक कौड़ी नहीं मिलती।
११—यह क़ायदा कर दीजिये कि सरकार के नौकरों या
आदमियों को न कोई अंगरेज़ उकसावे और न उन्हें आश्रय दे।
१२—कम्पनी की कोठियों से जो सिपाही मुल्क के विविध
भागों में भेजे जाते हैं, वे गाँव के गाँव उजाड़ डालते हैं और उनके
अत्याचारों के कारण रय्यत गाँव छोड़ कर भाग जाती है।
१३—इस मुल्क के जो ग़रीब लोग सदा से नमक, छालिया,
तम्बाकू इत्यादि का व्यापार करते थे, उन सब की रोज़ी अब
यूरोपनिवासियों ने छीन ली है, जिससे कम्पनी को कोई फ़ायदा
नहीं और सरकारी आमदनी को बहुत बड़ा नुक़सान है। ❋

  • Long's Selections, pp. 356-358.