भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०० भारत में अंगरेज़ी राज
सार नीचे दिया जाता है, जिससे उस समय के बंगाल की
हालत का ख़ासा अन्दाज़ा लगाया जा सकता है। शिकायतें इस
प्रकार थीं :—
१—पटने में करनलगंज और मारूगंज नाम की दो नई मंडियां
अंगरेज़ों ने क़ायम की हैं। वहाँ के अंगरेज़ अफ़सर पुरानी सरकारी
मंडियों के व्यापारियों को ज़बरदस्ती पकड़ पकड़ कर अपने यहाँ
ले जाते हैं, जिसके कारण मेरी मंडियाँ उजड़ गईं और मुझे एक
लाख का नुक़सान हो रहा है।
२—पटना और मुर्शिदाबाद की कचहरियों की यह हालत है कि
वहाँ पर तमाम व्यापारी अंगरेज़ी कोठियों की आड़ लेकर सरकारी
महसूल देने से इनकार कर देते हैं।
३—जगह जगह अंगरेज़ गुमाश्ते सरकार के बाग़ियों और
मुजरिमों को अपने यहाँ आश्रय देते हैं।
४—हल्के और घटिया सिक्के ढालकर टकसाल के अधिकार
का दुरुपयोग किया जा रहा है।
५—क़ासिमबाज़ार की कोठी के गुमाश्तों ने ज़बरदस्ती दम-
दम, शिवपुर और बामनघाट इन तीनों गांव पर क़ब्ज़ा कर लिया
है और एक कौड़ी मालगुज़ारी नहीं देते।
६—अंगरेज़ गुमाश्ते अपना तम्बाकू और दूसरा माल ताल्लुक़-
दारों और रय्यत के सर ज़बरदस्ती मढ़ देते हैं, जिससे मुल्क
वीरान हो रहा है और सरकार की आमदनी को बहुत भारी
नुक़सान हो रहा है।