भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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ज़िन्दगी के लिये और ख़ास कर हमारे शिक्षित देशवासियों की मानसिक
अवस्था पर इतना गहरा पड़ा है कि आज हमारी क़ौमी तरक्क़ी के मार्ग में
यही सबसे बड़ी बाधा दिखाई दे रही है। इसके अलावा अनेक भयङ्कर
ऐतिहासिक भ्रान्तियों और झूठों का स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों और अन्य
उपायों द्वारा इतना ज़्यादा प्रचार किया गया है कि आज हमारे असंख्य
विचारवान देशवासी इन ऐतिहासिक भ्रान्तियों की भूलभुलइयों में पड़
कर अपनी सलामती के उपायों को सोच सकने के बिलकुल नाक़ाबिल
हो रहे हैं।
हमारे इतिहास के भ्रम
कहा जाता है, अनादिकाल से भारत पर पश्चिमोत्तर सीमा की ओर
से विदेशियों या विदेशी जातियों के हमले होते रहे हैं, भारत कभी भी इन
आरम्भ में इङ्गलिस्तान ने दिखाई, उसके बाद अमरीका इस कला में
इंगलिस्तान से भी बढ़ गया । वह लिखता है—
"राष्ट्रपति विल्सन ने इस कला में जो दक्षता दिखलाई वह संसार के
इतिहास में अद्वितीय है ।” लेखक ने पिछले महायुद्ध के समय के अंगरेज़ों
के कई प्रसिद्ध झूठों की मिसालें दी हैं ! मसलन संसार के अख़बारों में छपा
था कि जरमन सिपाहियों ने बेल्जियम वालों के अनेक बच्चों के हाथ काट
डाले । यह बात शुरू से आख़ीर तक झूठी थी । इस ख़बर के सम्बन्ध में युद्ध
के समाप्त होने पर इतालियों के प्रधान-मन्त्री सीन्योर नित्ती ने लिखा था—
"युद्ध के बाद एक धनाढ्य अमरीकन ने अपना एक दूत इस उद्देश
से बेल्जियम भेजा कि जिन ग़रीब बालकों के नन्हें नन्हें हाथ काट डाले