भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६० भारत में अंगरेज़ी राज
अस्तित्व को मिटाकर अनेक बार अपना जुश्रा मुसलमान क़ौमों के
कन्धों पर रक्खा है। ईसाइयों श्रौर मुसलमानों के इस सदियों के
विरोध के श्रालावा भी यूरोपियनों का ख़ास कर किसी यूरोपियन
क़ौम के विरुद्ध अपने किसी एशियाई स्वामी के साथ वफ़ादारी
कर सकना क़रीब क़रीब नामुमकिन है। इस सच्चाई को न समझ
सकना श्रनेक भारतीय श्रौर श्रन्य एशियाई शासकों के लिए घातक
साबित हुआ है।
कलकत्ते में इस समय श्रारमीनिया का एक मशहूर ईसाई
सौदागर ख़ोजा पेतरूस रहता था। इस सौदागर का एक भाई
ख़ोजा ग्रिगरी मीर क़ासिम की सेना में एक अफ़सर था श्रौर भी
कई श्रारमोनियन ईसाई मीर क़ासिम की सेना में नौकर थे। मेजर
एडम्स ने ख़ोजा पेतरूस की मारफ़त गुप्त पत्र व्यवहार द्वारा इन
सब लोगों को अपनी श्रोर फोड़ लिया।
इनके अलावा मीर क़ासिम की सेना में एक अंगरेज़ सिपाही
एक अंगरेज़ भी था, जो कुछ समय पहले अंगरेज़ी सेना को
विश्वासघातक छोड़कर नवाब के यहाँ भरती हो गया था। इस
अंगरेज़ को अपनी सेना में भरती कर लेना मीर
क़ासिम के नाश का सबसे बड़ा सबब साबित हुआ। उसने
मिरज़ा नजफ़ ख़ाँ के आने जाने के मार्ग को धीरे धीरे श्रच्छी तरह
देख लिया श्रौर एक दिन, जब कि मालूम होता है दुर्ग के भीतर के
श्रन्य ईसाई श्रौर ग़ैर ईसाई विश्वासघातकों के साथ सारी योजना
पक्की की जा चुकी थी, ४ सितम्बर की रात को क़रीब दस बजे