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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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मीर क़ासिम १८६
ज़रा भी हानि पहुँचा सके। दूसरी ओर एक साहसी और परहेज़-
गार मुसलमान सेनापति मिरज़ा नजफ़ ख़ाँ रोज़ रात के पिछले
पहर उसी दलदल के रास्ते आकर अंगरेज़ी सेना पर धावा करता
और अनेकों को ख़त्म कर और बहुत सा माल लेकर उसी रास्ते
लौट जाता। अंगरेज़ी सेना किसी तरह उसका पीछा न कर पाती
थी। लड़ाई का सामान भी अंगरेज़ों की निस्बत मीर क़ासिम की
सेना के पास कहीं अच्छा था। अंगरेज़ इतिहास लेखक ब्रूम लिखता
है कि भारत की बनी हुई जो बन्दूकें इस समय मीर क़ासिम की
सेना के पास थीं वह अंगरेज़ी सेना की, इंगलिस्तान की बनी हुई
बन्दूकों से धातु, बनावट, मज़बूती, उपयोगिता इत्यादि सब बातों
में कहीं बढ़िया थीं।* ईमानदारी की लड़ाई में अंगरेज़ किसी
तरह मीर क़ासिम पर विजय न प्राप्त कर सकते थे।
मीर क़ासिम की सेना का एक ख़ास दोष, जो उसके लिए
मीर क़ासिम के घातक सिद्ध हुआ, यह था कि उसने अनेक
ईसाई अफ़सरों यूरोपियन और आरमीनियन ईसाइयों को अपनी
की नमकहरामी सेना के बड़े बड़े ओहदों पर नियुक्त कर रक्खा
था। ईसा की ११ वीं सदी से लेकर जब कि
यूरोप की कई ईसाई शक्तियों ने मिल कर पहली बार मुसलमानों
से जेरुसेलम (बैतुलमुक़द्दस) छीनना चाहा, आज तक हज़रत ईसा
और हज़रत मोहम्मद के अनुयायियों के बीच प्रायः लगातार संग्राम
होते रहे हैं। ईसाई ताक़तों ने अनेक मुसलमान राज्यों के स्वतन्त्र

  • History of the Bengal Army, by Broome, p. 351.